आध्यात्मिक प्रदूषण क्या है?

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हम अपनी किशोरावस्था से "प्रदूषण" शब्द काफी सुनते आ रहे हैं। बीसवीं सदी की शुरुआत में पृथ्वी के प्रदूषण का स्तर काफी तेज़ी से बढ़ने लगा था ।


                          

लेकिन "आध्यात्मिकता" शब्द "प्रदूषण" से कैसे संबंधित है? इसे समझने के लिए हमें सबसे पहले यह समझना होगा कि अध्यात्म क्या है?

संक्षेप में, अध्यात्म में "आत्म" शब्द है और आत्म से "आत्मा" शब्द बनता है। । मोटे तौर पर लगातार जागरूक रहते हुए यह एक कार्य करने की कला है कि हम केवल एक मानव शरीर नहीं बल्कि एक आत्मा भी हैं। तो वर्तमान जीवन को आत्मा की अनंत यात्रा में 2 मिनट का स्टेशन माना जा सकता है।

जो लोग सिर्फ 2 मिनट (वर्तमान जीवन) पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वे अल्पकालिक खुशी पर ध्यान केंद्रित करते रह जाते है ।

                                    

                                  

वे सांसारिक सुख और इन्द्रियों के भोग में व्यस्त रहते है या अधिक रुचि रखते हैं। वे एक ऐसा जीवन जी रहे है जो बिना किसी जागरूकता के दैनिक जरूरत जरूरत भर की चीजों को करने पर केंद्रित है।

जैसे की ज्यादा तर  मांसाहारी भोजन करना,सिर्फ धन अर्जित करने के बारे सोचना , गलत तरीकों से जीविकोपार्जन, कई यौन साथी रखना, नियमित रूप से शराब/धूम्रपान करना, बहुत अधिक गाली देना, पोर्न देखना, ब्लैकमेल करना,जिम्मेदारियों से बचना, स्वतंत्रता का दुरुपयोग करना -पसंद करने वाली आदतें। 


एक व्यक्ति जो से आत्म-केंद्रित नहीं है, धीरे धीरे उस स्तर पर पहुंच जाता है  जब उसकी जीवन-निर्वाह क्षमता बहुत कमजोर हो हो जाती है ,उसको लाइलाज बीमारियां  घेर लेती है । इसे आध्यात्मिक प्रदूषण के रूप में जाना जाता है।

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम(IBS)भी ऐसे वाले लक्षणों में से "एक" है जो सभी में तो नहीं पर किसी-२ देखने को मिल जाती है |

अपने अगले आने लेख में, मैं विस्तार से बताऊंगा इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम(IBS) कि कैसे  किसी व्यक्ति के अशुद्ध आध्यात्मिक स्तर से संबंधित हो सकता है । हम कुछ तकनीकों पर भी चर्चा करेंगे जो आध्यात्मिकता के स्तर को साफ करने के लिए घर बैठे आसानी से की जा सकती हैं।


पढ़ने का आनंद लें!


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