आपकी ज़िंदगी में वह कौन सा पल था, जब आपकी आंखों में खुशी और दुःख के आंसू, दोनों एक साथ आए ?
मेरे साथ ऐसा दिनाक १२-०२-२०१२ में हुआ था |
इस दिन हम लोग मेरी शादी करके वापिस आ रहे थे सुबह कानपुर से मैनपुरी यानि अपने घर |
सब लोग खुश थे क्यूंकि लगभग सारे कार्येक्रम ठीक से पूरे हो गए थे और बस घर पर पहुंच कर कुछ और रस्में करनी बाकि थी |
मैनपुरी(घर) से कुछ 18 किलोमीटर पहले ही ड्राइवर जो गाड़ी चला रहा था उसका ध्यान कुछ भटक गया क्यूंकी वह पापा और मेरे भाई(जो फ्रंट सीट पर बैठे थे) के बातें सुनने में भूल गया को सामने से एक मेटाडोर आ रही थी और जब वाह सिर्फ ३ फ़ीट की दूरी रह गयी तो मेरी नज़र ड्राइवर पर पड़ी और फिर मेटाडोर पर जो एकदम सामने थी |
पीछे सीट पर मैं बिच में था और मेरी मम्मी बाईये और मेरी पत्नी दाहिने और ,दोनों सो रही थी पर मैं जगा हुआ था |
इतने पास मेटाडोर आते देख कर मेरे तो जैसे प्राण सुख गए थे और मेरी आवाज़ मुहं में रह गयी |
उस दिन मैंने चत्मकार होते देखा था , लगभग २ सेकंड के अंदर ही मेरी भाई ने ड्राइवर का स्टीयरिंग पूरी तरह से बाईये ओर घूमा दी और फिर लगभग आधे सेकंड में दाहिने ओर , वह मेटाडोर सिर्फ कुछ इंच की दुरी से हो कर दाहिने से निकल गयी |
ड्राइवर अब समझ पाया था की क्या हुआ है फिर उसने पूरी जोर से ब्रेक मारे , तब तक पीछे भी किसी बड़ी गाड़ी के ब्रेक मरने की आवाज़ आयी |
देखा तो एक ट्रेवल बस हमसे ठीक कुछ २-३ फुट पर आ कर रुक गयी थी ,यानि हम लोग दोनों आगे और पीछे से गाड़ी से घिर गए थे पर पता नहीं कैसे श्री बजरंग बलि की कृपा से मेरी भाई का हाथ सही समय से और सही दिशा में घूमने से हम लोग बाल बाल बचे गए |
पीछे बस वाला उतर कर आया और हमे बताने लगा की अभी उसने चत्मकार होते देखा है|
मेरी ऑंखें से आंसू रुक नहीं पा रहे थे | घर पहुंच कर बैंड बजने लगा और द्वार के रस्में शुरू हुई तो समझ नहीं आ रहा था की जो फीलिंग आ रही है वह ख़ुशी के है या अभी सामने से मृत्यु के मुहं से निकल कर आने की अचम्बे की थी |
उस दिन मेरा भाई बहुत ही संयोग से गियर और सीट पर बैठ गया था जबकि हम ने उस १० बार पीछे बुला कर बैठने को बोला था , शायद श्री बजरंग बलि उस के अंदर आ कर हमारी रक्षा कर रहे थे |
जय श्री राम। जय बजरंग बलि।

कभी कभी प्रभु अप्रत्यक्ष रूप में हमारी मदद करते हैं |
ReplyDeleteबिलकुल सही कहा |
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